बिकने वाले ओर भी हैं जा कर खरीद लो.....??
मोहसिन..
हम लोग क़ीमत से नही
क़िस्मत से मिला करते हैं....
कल रात मैने अपने सारे
दर्द दीवारो पेर लिख डाले
रात भर दीवारो रोती
रहीं ओर हम चैन से सोते रहे...
वहह मोसम तेरी वफ़ा
पे आज दिल खुश हो गया
याद-ए-यार मुझे आई
ओर बरस तू परा……….
यह रिम झिम, यह बारिश,
यह आवारगी का मोसम……
हमारी बस में होता
तो, तेरी पास चली आते……….
बात तो सच हा मगर दिल
मानता नही,
मोहसिन.....
क बारिश में मेरा घर
जला केसे ?.....
अगीब रंग दे गये हैं
नये मोसमूं की बारिश,
मुझे याद आ रहा है
मुझे भूल जाने वाला.....
तारपता देख कर मुझे
तरस तुम भी जाओगे
हुए न्मम अगर हम बरस
तुम भी जाओगी….
राह तकते हुआी जब ठक
गई आँखें मेरी,
फिर तुझे ढूंदनी मेरी
आँख से आँसू निकले.....
रो रहा आसमान भी आज
मेरी वफ़ा देख कर…
देख बात तेरी बेवफ़ाई
की बादलों तक जा पहंची.....
मेरी आँखें और दीदार
आप का,
ये क़यामत आ गई या
ख्वाब है.....
मंज़िले भी उसकी थी,
रास्ता भी उसका था…
एक मई अकेला था, क़ाफ़िला
भी उस का था
साथ साथ चलने की सोच
भी उसकी थी
फिर रास्ता बदलनी का
फ़ैसला भी उसका था
आज क्यो अकेला हू,
दिल सवाल करता है
लोग तू उसी के थे,
काइया खुदा भी उसका था.....
ये जो तुम बात बात
पे, रूठा करती थाइ ना……..
बस वहीं से इस मोह्हबत
की इब्तेद हुई है.....
नवबी तो शामिल मेरे
खून मैं थी
पता न्ही ये दिल गुलामी
कसे करने लगा.....
आँखों का है फ़रैब
या अक्स ए जमाल है,
आती ही क्यूँ नज़र
तेरी सूरत जगह जगह…………
शोहर अपनी बीवी के
दिल पर उससी व्वक़्त राज कर सकता है..
जब्ब वो उस की सचे
दिल से इज़्ज़त करेगा…..
नाम तो लिख दू मगेर
फिर खेयाल आता ही...
मलिक...
मासूम है सनम बदनाम
ना हो जाए…..
में कुछ लम्हा ओर तेरा
साथ चाहता हू, जो आँखो में बस जाए वो बरसात चाहता हू, सुना ह वो मुझे बहुत चाहता ह,
बस एक बार में उसे सुनना चाहता हू……
इस सूरज के मिज़ाज़
भी उस शख्स जेसे हें...
मोहसिन......
बिन जिसके जी नही सकता
और पास जाता हों तो जला देता है…..
मिज़ाज़ -ए- यार से
मैं जितना सहनशहा हो जाता हू...
Mohsin…………….
मैं ओर तन्हा , ओर
तन्हा , ओर तन्हा होता जाता हों….
चले हो साथ तो हिम्मत
ना हारना
मोहसिन...
क्यी मंज़िलों का तसाउर
मेरे सफर माए नही………………..

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